श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.137.42 
तदिदं समनुप्राप्तं क्षत्तुर्नि:श्रेयसं वच:।
इति संचिन्त्य ते पुत्रो नोत्तरं प्रत्यपद्यत॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
विदुरजी के कहे हुए हितकर वचनों के कारण ही हम पर यह विपत्ति आई है। ऐसा सोचकर आपका पुत्र उत्तर देने में असमर्थ हो गया ॥42॥
 
This calamity has befallen us because of the benevolent words spoken by Viduraji. Thinking so, your son was unable to give any reply. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)