vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 136: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णका पलायन, धृतराष्ट्रके सात पुत्रोंका वध तथा भीमका पराक्रम
»
श्लोक 5
श्लोक
7.136.5
अविचिन्त्याथ तान् बाणान् कर्णेनास्तान् वृकोदर:।
रणे विव्याध राधेयं शतेनानतपर्वणाम्॥ ५॥
अनुवाद
कर्ण के बाणों की परवाह न करते हुए भीमसेन ने युद्धभूमि में राधापुत्र कर्ण को मुड़े हुए सौ बाणों से घायल कर दिया।
Without caring about the arrows shot by Karna, Bhimasena wounded the son of Radha on the battlefield with a hundred arrows having bent ends.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×