श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 136: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णका पलायन, धृतराष्ट्रके सात पुत्रोंका वध तथा भीमका पराक्रम  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.136.32 
नादयन्तौ प्रहर्षन्तौ विक्रीडन्तौ परस्परम्।
मण्डलानि विकुर्वाणौ रथाभ्यां रथसत्तमौ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
रथियों में श्रेष्ठ भीम और कर्ण सिंहों के समान गर्जना करते हुए हर्ष से भर गये और अपने रथों पर सवार होकर आपस में क्रीड़ा करते हुए इधर-उधर घूमने लगे।
 
Bhima and Karna, the best of charioteers, roared like lions, were filled with joy and moved about in circular motion in their chariots, playing amongst themselves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)