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mahabharat 7.136.31: जैसे दो हाथी अपने दाँतों से एक दूसरे पर आक्रमण करते हैं, उसी प्रकार वे वीर शत्रु एक दूसरे के शरीर को बाणों से छेदते हुए शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.136: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णका पलायन, धृतराष्ट्रके सात पुत्रोंका वध तथा भीमका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.136.31 
वारणाविव चान्योन्यं विषाणाभ्यामरिंदमौ।
निर्भिन्दन्तौ स्वगात्राणि सायकैश्चारु रेजतु:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जैसे दो हाथी अपने दाँतों से एक दूसरे पर आक्रमण करते हैं, उसी प्रकार वे वीर शत्रु एक दूसरे के शरीर को बाणों से छेदते हुए शोभायमान हो रहे थे।
 
Just as two elephants attack each other with their tusks, similarly those brave enemies were looking beautiful as they pierced each other's bodies with their arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)