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mahabharat 7.135.5-6h: परन्तु जब दुर्योधन ने कर्ण को युद्ध भूमि में विषहीन सर्प की भाँति पराजित होकर युद्ध से भागते देखा, तो उसने क्या कहा?   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  7.135.5-6h 
तत्र तं निर्जितं दृष्ट्वा भुजङ्गमिव निर्विषम्॥ ५॥
युद्धात् कर्णमपक्रान्तं किंस्विद् दुर्योधनोऽब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
परन्तु जब दुर्योधन ने कर्ण को युद्ध भूमि में विषहीन सर्प की भाँति पराजित होकर युद्ध से भागते देखा, तो उसने क्या कहा?
 
But what did Duryodhana say when he saw Karna defeated in the battle field like a non-poisonous snake and fleeing from the battle? 5 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)