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mahabharat 7.135.37: वे अपने सारथियोंसहित प्राणशून्य होकर रथोंसे नीचे गिर पड़े, मानो किसी प्रचण्ड आँधी ने विचित्र पुष्पोंवाले विशाल वृक्षोंको उखाड़कर नष्ट कर दिया हो ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.135.37 
प्रापतन् स्यन्दनेभ्यस्ते सार्धं सूतैर्गतासव:।
चित्रपुष्पधरा भग्ना वातेनेव महाद्रुमा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वे अपने सारथियोंसहित प्राणशून्य होकर रथोंसे नीचे गिर पड़े, मानो किसी प्रचण्ड आँधी ने विचित्र पुष्पोंवाले विशाल वृक्षोंको उखाड़कर नष्ट कर दिया हो ॥37॥
 
They, along with their charioteers, fell down from their chariots, lifeless, as if a violent storm had uprooted and destroyed huge trees bearing strange flowers. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)