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mahabharat 7.135.31: महाबाहु भीमसेन को चारों ओर से घेरकर उन्होंने अपने बाणों से सम्पूर्ण दिशाओं को टिड्डियों के समान आच्छादित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.135.31 
ते समन्तान्महाबाहुं परिवार्य वृकोदरम्।
दिश: शरै: समावृण्वन् शलभानामिव व्रजै:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु भीमसेन को चारों ओर से घेरकर उन्होंने अपने बाणों से सम्पूर्ण दिशाओं को टिड्डियों के समान आच्छादित कर दिया।
 
Surrounding the mighty-armed Bhimasena from all sides, he covered all directions with his arrows, like a swarm of locusts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)