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mahabharat 7.135.26: अपने पुत्रों की हर बात से सहमत होकर तुमने स्वयं ही इस महान् शत्रुता की नींव डाली है और जब किसी ने तुम्हें इसे समाप्त करने के लिए कुछ सुझाया, तो तुमने उसकी बात नहीं सुनी, जैसे मरता हुआ मनुष्य उपयोगी औषधि नहीं लेता॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.135.26 
स्वयं वैरं महत् कृत्वा पुत्राणां वचने स्थित:।
उच्यमानो न गृह्णीषे मर्त्य: पथ्यमिवौषधम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्रों की हर बात से सहमत होकर तुमने स्वयं ही इस महान् शत्रुता की नींव डाली है और जब किसी ने तुम्हें इसे समाप्त करने के लिए कुछ सुझाया, तो तुमने उसकी बात नहीं सुनी, जैसे मरता हुआ मनुष्य उपयोगी औषधि नहीं लेता॥ 26॥
 
By agreeing with everything your sons said, you yourself have laid the foundation of this great enmity and when someone suggested something to you to end this, you did not listen to him, just like a dying man does not take useful medicine.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)