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mahabharat 7.135.12-13h: भीमसेन के विरुद्ध कौन जा सकता है, जिन्होंने अकेले ही द्रोणाचार्य को परास्त कर दिया और धनंजय को ढूँढ़ने के लिए मेरी सेना में प्रवेश किया? ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.135.12-13h 
द्रोणं य: सम्प्रमथ्यैक: प्रविष्टो मम वाहिनीम्॥ १२॥
भीमो धनंजयान्वेषी कस्तमार्च्छेज्जिजीविषु:।
 
 
अनुवाद
भीमसेन के विरुद्ध कौन जा सकता है, जिन्होंने अकेले ही द्रोणाचार्य को परास्त कर दिया और धनंजय को ढूँढ़ने के लिए मेरी सेना में प्रवेश किया? ॥12 1/2॥
 
Who can go against Bhimasena, who single-handedly crushed Dronacharya and entered my army to find Dhananjaya? ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)