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mahabharat 7.134.9: युद्धस्थल में सूतपुत्र के धनुष से छूटा हुआ वह विचित्र पंखवाला बाण भीमसेन को छेदता हुआ पृथ्वी को चीरता हुआ उसके अन्दर जा घुसा।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.134.9 
स निर्भिद्य रणे पार्थं सूतपुत्रधनुश्च्युत:।
अगच्छद् दारयन् भूमिं चित्रपुङ्ख: शिलीमुख:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में सूतपुत्र के धनुष से छूटा हुआ वह विचित्र पंखवाला बाण भीमसेन को छेदता हुआ पृथ्वी को चीरता हुआ उसके अन्दर जा घुसा।
 
That strange winged arrow shot from the bow of Suta's son on the battlefield pierced Bhimasena and after ripping through the earth entered inside it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)