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mahabharat 7.134.34-35: परन्तु महायोद्धा भीमसेन अपने स्वर्ण धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हुए धधकती हुई अग्नि के समान युद्धभूमि में खड़े रहे।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  7.134.34-35 
भीमसेनस्तु विस्फार्य चापं हेमपरिष्कृतम्॥ ३४॥
आहवेऽतिरथोऽतिष्ठज्ज्वलन्निव हुताशन:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु महायोद्धा भीमसेन अपने स्वर्ण धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हुए धधकती हुई अग्नि के समान युद्धभूमि में खड़े रहे।
 
But the great warrior Bhimasena stood on the battlefield like a blazing fire, stringing his golden bow.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि कर्णापयाने चतुस्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें कर्णका पलायनविषयक एक सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)