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परन्तु महायोद्धा भीमसेन अपने स्वर्ण धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हुए धधकती हुई अग्नि के समान युद्धभूमि में खड़े रहे।
But the great warrior Bhimasena stood on the battlefield like a blazing fire, stringing his golden bow.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि कर्णापयाने चतुस्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें कर्णका पलायनविषयक एक सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥