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mahabharat 7.134.31-32h: युद्धभूमि में अत्यन्त भेदी बाणों से घायल होकर भीमसेन के शरीर से उसी प्रकार रक्त बहने लगा, जैसे पर्वतीय झरने से जल बहता है।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.134.31-32h 
स निर्भिन्नो रणे भीमो नाराचैर्मर्मभेदिभि:॥ ३१॥
सुस्राव रुधिरं भूरि पर्वत: सलिलं यथा।
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में अत्यन्त भेदी बाणों से घायल होकर भीमसेन के शरीर से उसी प्रकार रक्त बहने लगा, जैसे पर्वतीय झरने से जल बहता है।
 
Pierced on the battlefield by deep-piercing arrows, Bhimasena began to bleed profusely, just as a mountain spring sheds water. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)