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mahabharat 7.134.30-31h: जब वे नराच पृथ्वी में प्रविष्ट हुए, तब वे अस्त होते हुए सूर्य की उज्ज्वल किरणों के समान सुन्दर दिखाई देने लगे ॥30 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.134.30-31h 
ते व्यरोचन्त नाराचा: प्रविशन्तो वसुंधराम्॥ ३०॥
गच्छत्यस्तं दिनकरे दीप्यमाना इवांशव:।
 
 
अनुवाद
जब वे नराच पृथ्वी में प्रविष्ट हुए, तब वे अस्त होते हुए सूर्य की उज्ज्वल किरणों के समान सुन्दर दिखाई देने लगे ॥30 1/2॥
 
When those Narachas entered the earth they looked as beautiful as the bright rays of the sun when it sets. ॥30 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)