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mahabharat 7.134.27-28h: जैसे क्रोध में भरकर महासर्प अपने बिल में आधा ही प्रवेश कर पाता है, उसी प्रकार वे बाण पृथ्वी को भेदते हुए शोभायमान हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.134.27-28h 
प्रसर्पमाणा मेदिन्यां ते व्यरोचन्त मार्गणा:॥ २७॥
अर्धप्रविष्टा: संरब्धा बिलानीव महोरगा:।
 
 
अनुवाद
जैसे क्रोध में भरकर महासर्प अपने बिल में आधा ही प्रवेश कर पाता है, उसी प्रकार वे बाण पृथ्वी को भेदते हुए शोभायमान हो रहे थे।
 
Just as a great serpent, when filled with rage, is able to enter only half way into its hole, similarly those arrows were looking beautiful while penetrating the earth. 27 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)