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श्लोक  7.134.26-27h 
अपिबन् सूतपुत्रस्य शोणितं रक्तभोजना:॥ २६॥
क्रुद्धा इव मनुष्येन्द्र भुजङ्गा: कालचोदिता:।
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! वे रक्तपिपासु बाण काल ​​से प्रेरित क्रोध से भरे हुए नागों के समान सूतपुत्र कर्ण का रक्त पीने लगे।
 
Narendra! Those blood-eating arrows, like the rage-filled cobras inspired by time, began to drink the blood of Suta's son Karna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)