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mahabharat 7.134.25-26h: महाराज! वे स्वर्ण पंखयुक्त अत्यन्त शक्तिशाली बाण उनके स्वर्ण कवच को भेदकर दसों दिशाओं को सुशोभित करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.134.25-26h 
ते तस्य कवचं भित्त्वा स्वर्णचित्रं महौजस:॥ २५॥
हेमपुङ्खा महाराज व्यशोभन्त दिशो दश।
 
 
अनुवाद
महाराज! वे स्वर्ण पंखयुक्त अत्यन्त शक्तिशाली बाण उनके स्वर्ण कवच को भेदकर दसों दिशाओं को सुशोभित करने लगे।
 
Maharaj! Those extremely powerful arrows with golden feathers pierced his golden armor and began to beautify all the ten directions. 25 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)