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mahabharat 7.134.2: जैसे दो विशाल हाथी अपने दाँतों के अग्रभागों से टकराते हैं, उसी प्रकार कर्ण और भीमसेन अपने धनुषों को पूरी तरह खींचकर छोड़े हुए बाणों द्वारा एक दूसरे पर प्रहार करने लगे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.134.2 
महागजाविवासाद्य विषाणाग्रै: परस्परम्।
शरै: पूर्णायतोत्सृष्टैरन्योन्यमभिजघ्नतु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जैसे दो विशाल हाथी अपने दाँतों के अग्रभागों से टकराते हैं, उसी प्रकार कर्ण और भीमसेन अपने धनुषों को पूरी तरह खींचकर छोड़े हुए बाणों द्वारा एक दूसरे पर प्रहार करने लगे॥ 2॥
 
Just as two huge elephants clashed with the tips of their tusks, similarly Karna and Bhimasena struck each other with arrows shot from their bows after drawing them fully.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)