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mahabharat 7.134.17-19h: भरतनंदन! दुर्योधन के ये वचन सुनकर दुर्मुख बड़ी शीघ्रता से कर्ण के पास आया और अपने बाणों से भीमसेन को रोक दिया। युद्ध में दुर्मुख को सूतपुत्र के पदचिन्हों पर चलता देखकर वायुपुत्र भीमसेन बहुत प्रसन्न हुए। वे उसके दोनों कंठ चाटने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 17-19h
 
 
श्लोक  7.134.17-19h 
ततो दुर्योधनवच: श्रुत्वा भारत दुर्मुख:॥ १७॥
त्वरमाणोऽभ्ययात् कर्णं भीमं चावारयच्छरै:।
दुर्मुखं प्रेक्ष्य संग्रामे सूतपुत्रपदानुगम्॥ १८॥
वायुपुत्र: प्रहृष्टोऽभूत् सृक्किणी परिसंलिहन्।
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! दुर्योधन के ये वचन सुनकर दुर्मुख बड़ी शीघ्रता से कर्ण के पास आया और अपने बाणों से भीमसेन को रोक दिया। युद्ध में दुर्मुख को सूतपुत्र के पदचिन्हों पर चलता देखकर वायुपुत्र भीमसेन बहुत प्रसन्न हुए। वे उसके दोनों कंठ चाटने लगे।
 
Bharata Nandana! On hearing these words of Duryodhan, Durmukha came near Karna in great haste and stopped Bhimasena with his arrows. Vayuputra Bhimasena was very happy to see Durmukha following the footsteps of Sutaputra in the battle. He started licking both his throats.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)