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mahabharat 7.134.15-17h: राजन! युद्धस्थल में रथहीन खड़े हुए पुरुषोत्तम कर्ण को देखकर दुर्योधन ने अपने भाई दुर्मुख से कहा - 'दुर्मुख! इस राधानन्दन को कर्ण भीमसेन ने रथ से वंचित कर दिया है। इस महारथी को रथ प्रदान करो।'   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 15-17h
 
 
श्लोक  7.134.15-17h 
विरथं तं नरश्रेष्ठं दृष्ट्वाऽऽधिरथिमाहवे॥ १५॥
दुर्योधनस्ततो राजन्नभ्यभाषत दुर्मुखम्।
एष दुर्मुख राधेयो भीमेन विरथीकृत:॥ १६॥
तं रथेन नरश्रेष्ठं सम्पादय महारथम्।
 
 
अनुवाद
राजन! युद्धस्थल में रथहीन खड़े हुए पुरुषोत्तम कर्ण को देखकर दुर्योधन ने अपने भाई दुर्मुख से कहा - 'दुर्मुख! इस राधानन्दन को कर्ण भीमसेन ने रथ से वंचित कर दिया है। इस महारथी को रथ प्रदान करो।'
 
Rajan! Seeing Karna, the best of men, standing without a chariot in the battlefield, Duryodhana said to his brother Durmukh – ‘Durmukh! This Radhanandan has been deprived of the chariot by Karna Bhimsen. Endow this great warrior with a chariot. 15-16 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)