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mahabharat 7.134.13-14h: जब घोड़ा और सारथि मारे गए और ध्वज गिर गया, तब कर्ण रथ छोड़कर दुःखी मन से धनुष घुमाता हुआ वहीं खड़ा रहा।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.134.13-14h 
हताश्वसूतमुत्सृज्य सरथं पतितध्वजम्॥ १३॥
विस्फारयन् धनु: कर्णस्तस्थौ भारत दुर्मना:।
 
 
अनुवाद
जब घोड़ा और सारथि मारे गए और ध्वज गिर गया, तब कर्ण रथ छोड़कर दुःखी मन से धनुष घुमाता हुआ वहीं खड़ा रहा।
 
After the horse and charioteer were killed and the flag fell, Karna left the chariot and stood there with a sad heart, twirling his bow. 13 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)