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mahabharat 7.134.10-11h: तदनन्तर क्रोध से लाल नेत्रों वाले महाबाहु भीमसेन ने अपनी चार पैरों वाली, वज्र के समान भयंकर, सुवर्णमय भुजाओं से विभूषित षटकोणीय गदा उठाकर बिना विचारे ही सारथिपुत्र कर्ण पर चला दी।   |   mahabharat अध्याय 7.134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 134: भीमसेन और कर्णका युद्ध, धृतराष्ट्रपुत्र दुर्मुखका वध तथा कर्णका पलायन  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  7.134.10-11h 
ततो भीमो महाबाहु: क्रोधसंरक्तलोचन:।
वज्रकल्पां चतुष्किष्कुं गुर्वीं रुक्माङ्गदां गदाम्॥ १०॥
प्राहिणोत् सूतपुत्राय षडस्रामविचारयन्।
 
 
अनुवाद
तदनन्तर क्रोध से लाल नेत्रों वाले महाबाहु भीमसेन ने अपनी चार पैरों वाली, वज्र के समान भयंकर, सुवर्णमय भुजाओं से विभूषित षटकोणीय गदा उठाकर बिना विचारे ही सारथिपुत्र कर्ण पर चला दी।
 
Then the mighty-armed Bhimasena, whose eyes were red with anger, picked up his six-angled mace, four-footed and as fierce as a thunderbolt, adorned with golden arms, and without thinking, hurled it at Karna, the son of a charioteer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)