Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.133.41-42h: तब भीमसेन ने अत्यन्त कुपित होकर अपने तीव्र बाणों से दुर्जय के प्राणों को छेद डाला और उसे सारथि तथा घोड़ों सहित यमलोक भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.133.41-42h 
भीमसेनोऽपि संक्रुद्ध: साश्वयन्तारमाशुगै:॥ ४१॥
दुर्जयं भिन्नमर्माणमनयद् यमसादनम्।
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन ने अत्यन्त कुपित होकर अपने तीव्र बाणों से दुर्जय के प्राणों को छेद डाला और उसे सारथि तथा घोड़ों सहित यमलोक भेज दिया।
 
Then Bhimasena, being very enraged, pierced the vital parts of Durjaya with his swift arrows and sent him to Yamaloka along with his charioteer and horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)