Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.133.37-39h: बाणों की वर्षा से मोहित होकर वह आगे क्या करे, यह सोच नहीं पा रहा था। कर्ण को इस संकट में देखकर राजा दुर्योधन क्रोध से काँपने लगा और दुर्जय को आदेश दिया, 'दुर्जय! जाओ। पांडवपुत्र भीमसेन राधापुत्र कर्ण को उसकी आँखों के सामने ही मारना चाहता है। तुम कर्ण का बल बढ़ाओ और उस दढ़ियल भीमसेन को शीघ्र मार डालो।' | mahabharat अध्याय 7.133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बाणों की वर्षा से मोहित होकर वह आगे क्या करे, यह सोच नहीं पा रहा था। कर्ण को इस संकट में देखकर राजा दुर्योधन क्रोध से काँपने लगा और दुर्जय को आदेश दिया, 'दुर्जय! जाओ। पांडवपुत्र भीमसेन राधापुत्र कर्ण को उसकी आँखों के सामने ही मारना चाहता है। तुम कर्ण का बल बढ़ाओ और उस दढ़ियल भीमसेन को शीघ्र मार डालो।'
Fascinated by the shower of arrows, he could not think of what to do next. Seeing Karna in such a crisis, King Duryodhan began to tremble with anger and ordered Durjaya to say, 'Durjaya! Go. Pandava's son Bhimsena wants to kill Radha's son Karna right in front of his eyes. You increase Karna's strength and kill that beardless Bhimsena quickly.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥