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mahabharat 7.133.36: युद्धभूमि में अपने घोड़े और सारथि के मारे जाने पर सूर्यपुत्र कर्ण बाणों से आच्छादित होकर गहरी चिन्ता में डूब गया।   |   mahabharat अध्याय 7.133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.133.36 
ततो वैकर्तन: कर्णश्चिन्तां प्राप दुरत्ययाम्।
स च्छाद्यमान: समरे हताश्वो हतसारथि:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में अपने घोड़े और सारथि के मारे जाने पर सूर्यपुत्र कर्ण बाणों से आच्छादित होकर गहरी चिन्ता में डूब गया।
 
After his horse and charioteer were killed in the battle-field, Karna, the son of Sun, covered with arrows, was immersed in deep worries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)