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mahabharat 7.133.34-35: आर्य! भीमसेन ने पुनः कर्ण के धनुष को मुट्ठी से काट डाला, उसके शंख के समान श्वेत रंग वाले घोड़ों को अपने बाणों से यमलोक भेज दिया तथा उसके सारथि को भी मारकर रथ के आसन से नीचे गिरा दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  7.133.34-35 
तस्य भीम: पुनश्चापं मुष्टौ चिच्छेद मारिष॥ ३४॥
शङ्खवर्णांश्च तानश्वान् बाणैर्निन्ये यमक्षयम्।
सारथिं च तथाप्यस्य रथनीडादपातयत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
आर्य! भीमसेन ने पुनः कर्ण के धनुष को मुट्ठी से काट डाला, उसके शंख के समान श्वेत रंग वाले घोड़ों को अपने बाणों से यमलोक भेज दिया तथा उसके सारथि को भी मारकर रथ के आसन से नीचे गिरा दिया।
 
Arya! Bhimasena once again cut off Karna's bow from the fist's grip, sent his horses, whose colour was as white as conch shells, to Yamaloka with his arrows and also killed his charioteer and threw him down from the chariot's seat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)