Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.133.25-26: हे राजन! उस शक्ति को केंचुल से छूटे हुए सर्प के समान टुकड़े-टुकड़े करके, क्रोधित हुए भीमसेन ने उस पर रणभूमि में सारथीपुत्र कर्ण के प्राण लेने के लिए मानो तीक्ष्ण पत्थर पर तीखे किए हुए, यमराज की गदा के समान भयंकर, मोरपंखों और सुवर्ण के परों से विभूषित बाणों का प्रहार करना आरम्भ किया। | mahabharat अध्याय 7.133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! उस शक्ति को केंचुल से छूटे हुए सर्प के समान टुकड़े-टुकड़े करके, क्रोधित हुए भीमसेन ने उस पर रणभूमि में सारथीपुत्र कर्ण के प्राण लेने के लिए मानो तीक्ष्ण पत्थर पर तीखे किए हुए, यमराज की गदा के समान भयंकर, मोरपंखों और सुवर्ण के परों से विभूषित बाणों का प्रहार करना आरम्भ किया।
Honorable King! Having cut that Shakti into pieces like a serpent freed from its skin, Bhimasena, infuriated, began to shoot at him, as if seeking the life of Karna, the son of a charioteer, on the battlefield, arrows sharpened on a whetstone, dreadful as the mace of Yama, adorned with peacock feathers and golden feathers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥