| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध » श्लोक 2-3 |
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| | | | श्लोक 7.133.2-3  | त्रिदशानपि वा युक्तान् सर्वशस्त्रधरान् युधि।
वारयेद् यो रणे कर्ण: सयक्षासुरमानुषान्॥ २॥
स कथं पाण्डवं युद्धे भ्राजमानमिव श्रिया।
नातरत् संयुगे पार्थं तन्ममाचक्ष्व संजय॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | संजय! जो कर्ण युद्धभूमि के लिए समस्त अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित देवताओं, यक्षों, राक्षसों और मनुष्यों को भी परास्त कर सकता है, वह युद्धभूमि में विजय की देवी से सुशोभित पाण्डव कुन्तीपुत्र भीमसेन को कैसे न परास्त कर सका? इसका कारण बताओ॥2-3॥ | | | | Sanjaya! The Karna who can defeat the gods, yakshas, demons and even humans equipped with all the weapons for the battle field, how could he not defeat Bhimasena, the son of Pandava Kunti, who was adorned with the goddess of victory in the battle field? Tell me the reason for this.॥2-3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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