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mahabharat 7.133.11: वह छल-कपट की कला जानता है, अतः छल से उन महामनस्वी पाण्डवों के राज्य को हड़प लेता है और उसे अपना समझकर उनका अपमान करता है॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 7.133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 133: भीमसेन और कर्णका युद्ध, कर्णके सारथिसहित रथका विनाश तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुर्जयका वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.133.11 
निकृत्या निकृतिप्रज्ञो राज्यं हृत्वा महात्मनाम्।
जितमित्येव मन्वान: पाण्डवानवमन्यते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह छल-कपट की कला जानता है, अतः छल से उन महामनस्वी पाण्डवों के राज्य को हड़प लेता है और उसे अपना समझकर उनका अपमान करता है॥ 11॥
 
He knows the art of deceit and fraud. Hence, by deceit, he usurps the kingdom of those great-minded Pandavas and insults them by considering it as his own.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)