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mahabharat 7.132.43-d1h: हे भारतश्रेष्ठ! वहाँ की भूमि क्षण भर में ही मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के निर्जीव शरीरों से आच्छादित हो गई और वह दक्षयज्ञ के संहार के समय रुद्र की क्रीड़ास्थली के समान प्रतीत होने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.132: भीमसेन और कर्णका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 132: भीमसेन और कर्णका घोर युद्ध  »  श्लोक 43-d1h
 
 
श्लोक  7.132.43-d1h 
मनुष्याश्वगजानां च शरीरैर्गतजीवितै:।
क्षणेन भूमि: संजज्ञे संवृता भरतर्षभ॥ ४३॥
(आक्रीडमिव रुद्रस्य दक्षयज्ञनिबर्हणे।)
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! वहाँ की भूमि क्षण भर में ही मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के निर्जीव शरीरों से आच्छादित हो गई और वह दक्षयज्ञ के संहार के समय रुद्र की क्रीड़ास्थली के समान प्रतीत होने लगी।
 
Bharatshrestha! The land there was covered with lifeless bodies of humans, horses and elephants in a moment and it started looking like the playground of Rudra during the massacre of Dakshayagya.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि भीमकर्णयुद्धे द्वात्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भीमसेन और कर्णका युद्धविषयक एक सौ बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ४३ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)