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mahabharat 7.132.37: वे दोनों महाबली योद्धा अपने तीखे बाणों द्वारा एक दूसरे को मार डालने के लिए आतुर होकर वर्षा करने वाले बादलों के समान अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.132: भीमसेन और कर्णका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 132: भीमसेन और कर्णका घोर युद्ध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.132.37 
तावन्योन्यं जिघांसन्तौ शरैस्तीक्ष्णैर्महारथौ।
प्रेक्षणीयतरावास्तां वृष्टिमन्ताविवाम्बुदौ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों महाबली योद्धा अपने तीखे बाणों द्वारा एक दूसरे को मार डालने के लिए आतुर होकर वर्षा करने वाले बादलों के समान अत्यन्त शोभायमान हो रहे थे ॥37॥
 
Those two mighty warriors, eager to kill each other with their sharp arrows, were looking very spectacular like rain-bearing clouds. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)