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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.131.53 
स कर्णं पञ्चविंशत्या नाराचानां समार्पयत्।
महीधरमिव श्वेतं गूढपादैर्विषोल्बणै:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उसने कान पर पच्चीस बाण मारे; उनके प्रभाव से कान श्वेत पर्वत के समान दिखाई देने लगा, जिसमें छिपे हुए पैरों वाले विषैले सर्प भरे हुए थे।
 
He shot twenty-five arrows at the ear; due to their impact, the ear appeared like a white mountain infested with poisonous serpents with hidden feet. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)