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mahabharat 7.131.46: भरतवंशी राजा! इस प्रकार सब ओर से बाणों से आच्छादित होकर रथियों में श्रेष्ठ कर्ण भी भीमसेन पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा॥46॥   |   mahabharat अध्याय 7.131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  7.131.46 
कर्णस्तु रथिनां श्रेष्ठश्छाद्यमान: समन्तत:।
राजन् व्यसृजदुग्राणि शरवर्षाणि भारत॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
भरतवंशी राजा! इस प्रकार सब ओर से बाणों से आच्छादित होकर रथियों में श्रेष्ठ कर्ण भी भीमसेन पर भयंकर बाणों की वर्षा करने लगा॥46॥
 
Bharatvanshi king! Thus, being covered by arrows from all sides, Karna, the best of the charioteers, also started raining fierce arrows on Bhima. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)