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mahabharat 7.131.39: महाराज! भीमसेन युद्धभूमि में भी अविचलित रहे, यद्यपि उनके शरीर पर कर्ण के धनुष से छूटे हुए विषैले सर्पों के समान भयंकर बाण लगे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.131.39 
स कर्णचापप्रभवानिषूनाशीविषोपमान्।
बिभ्रद् भीमो महाराज न जगाम व्यथां रणे॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! भीमसेन युद्धभूमि में भी अविचलित रहे, यद्यपि उनके शरीर पर कर्ण के धनुष से छूटे हुए विषैले सर्पों के समान भयंकर बाण लगे थे।
 
Maharaj! Bhimasena remained unhurt in the battle-field even though he bore on his body the dreadful arrows, which were like poisonous snakes, shot from Karna's bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)