श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.131.38 
ततोऽचिन्त्य महाबाहु: कर्णकार्मुकनि:सृतान्।
समाश्लिष्यदसम्भ्रान्त: सूतपुत्रं वृकोदर:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु भीमसेन ने कर्ण के धनुष से छूटे हुए बाणों की ओर ध्यान न दिया और बिना किसी भय के सारथिपुत्र के पास ऐसे पहुंचे, मानो वह उनके निकट ही आ रहा हो।
 
The mighty-armed Bhimasena paid no heed to the arrows shot from Karna's bow and without any fear approached the son of a charioteer as close as if he were moving close to him. 38
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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