श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.131.37 
तस्य कर्णश्चतु:षष्टॺा व्यधमत् कवचं दृढम्।
क्रुद्धश्चाप्यहनत् पार्थं नाराचैर्मर्मभेदिभि:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने चौसठ बाण चलाकर भीमसेन के सुदृढ़ कवच को फाड़ डाला, फिर क्रोध में आकर उसने गहरे भेदने वाले बाणों से कुन्तीकुमार को बुरी तरह घायल कर दिया।
 
Karna shot sixty-four arrows and tore apart Bhimasena's strong armour. Then in a fit of rage he severely wounded Kuntikumar with deep-piercing arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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