| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय » श्लोक 36 |
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| | | | श्लोक 7.131.36  | सरथ: सध्वजस्तत्र ससूत: पाण्डवस्तदा।
प्राच्छाद्यत महाराज कर्णचापच्युतै: शरै:॥ ३६॥ | | | | | | अनुवाद | | महाराज ! उस समय पाण्डु नन्दन भीमसेन अपने रथ, ध्वजा और सारथि सहित कर्ण के धनुष से छूटे हुए बाणों से आच्छादित हो गये ॥36॥ | | | | Maharaj! At that time, Pandu Nandan Bhimsen along with his chariot, flag and charioteer were covered by the arrows released from Karna's bow. 36॥ | | ✨ ai-generated | | |
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