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mahabharat 7.131.33: तत्पश्चात् विचित्र कवच धारण करने वाले सूतपुत्र पर सुवर्णमय पंखों से तीक्ष्ण तथा अच्छी तरह छोड़े हुए इक्कीस बाणों द्वारा पुनः आक्रमण किया गया ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 7.131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.131.33 
पुनश्च सूतपुत्रं तु स्वर्णपुङ्खै: शिलाशितै:।
सुमुक्तैश्चित्रवर्माणं निर्बिभेद त्रिसप्तभि:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विचित्र कवच धारण करने वाले सूतपुत्र पर सुवर्णमय पंखों से तीक्ष्ण तथा अच्छी तरह छोड़े हुए इक्कीस बाणों द्वारा पुनः आक्रमण किया गया ॥33॥
 
After that, Sutaputra, wearing strange armor, was attacked again by twenty-one arrows, sharpened with golden wings and well shot. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)