श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 131: भीमसेनके द्वारा कर्णकी पराजय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.131.22 
कर्ण उवाच
भीमाहितैस्तव रणे स्वप्नेऽपि न विभावितम्।
तद् दर्शयसि कस्मान्मे पृष्ठं पार्थदिदृक्षया॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा - भीमसेन ! आपके शत्रुओं ने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि आप युद्ध में पीठ दिखाएंगे; परन्तु इस समय अर्जुन से मिलने के लिए आप मेरी ओर पीठ क्यों कर रहे हैं ?॥ 22॥
 
Karna said - Bhimsena! Your enemies never even dreamt that you would turn your back in the war; but why are you turning your back to me to meet Arjuna at this time?॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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