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श्लोक 7.131.12  |
आशास्ते च सदा सूत पुत्रो दुर्योधनो मम।
कर्णो जेष्यति संग्रामे समस्तान् पाण्डवानिति॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| संजय! मेरा पुत्र दुर्योधन सदैव यही आशा करता है कि कर्ण युद्ध में समस्त पाण्डवों को परास्त कर देगा॥12॥ |
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| Sanjaya! My son Duryodhana always hopes that Karna will defeat all the Pandavas in the war.॥ 12॥ |
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