श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.130.43 
भङ्‍‍क्‍त्‍वा रथं स पुत्रस्ते हताश्वो हतसारथि:।
मद्रराजरथं तूर्णमारुरोह परंतप:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस रथ को नष्ट करके शत्रुओं को पीड़ा देने वाला वह अश्व और सारथि से रहित होकर शीघ्र ही मद्रराज शल्य के रथ पर चढ़ गया।
 
Having thus destroyed that chariot, the tormentor of enemies, deprived of horses and charioteer, soon boarded the chariot of Madra king Shalya. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)