श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.130.42 
तत: स हेमचित्रं तं गदया स्यन्दनं गदी।
संक्रुद्ध: पोथयामास साश्वसूतध्वजं नृप॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों! तत्पश्चात् गदाधारी दुर्योधन ने अत्यन्त कुपित होकर उस सुन्दर स्वर्णजटित रथ को घोड़ों, सारथि और ध्वजा सहित अपनी गदा के प्रहार से टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
O lord of men! Thereafter the mace-wielding Duryodhana became very angry and smashed that beautiful gold-plated chariot, along with the horses, charioteer and flag, to pieces with the blow of his mace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)