श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.130.38 
स रथं प्राप्य तं भ्रातुर्दुर्योधनहयान् शरै:।
बहुभिस्ताडयामास ते हता: प्रापतन् भुवि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई के रथ पर बैठे हुए उत्तमौजन ने दुर्योधन के घोड़ों पर अपने अनेक बाणों से इतना प्रहार किया कि वे निर्जीव होकर भूमि पर गिर पड़े।
 
Sitting on his brother's chariot, Uttamaujana attacked Duryodhana's horses with his numerous arrows, so much so that they fell lifeless on the ground.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)