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mahabharat 7.130.37: युद्ध में जब घोड़े और सारथी मारे गए, तो उत्तमौजा शीघ्रता से अपने भाई युधिष्ठिर के रथ पर चढ़ गया।   |   mahabharat अध्याय 7.130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.130.37 
उत्तमौजा हताश्वस्तु हतसूतश्च संयुगे।
आरुरोह रथं भ्रातुर्युधामन्योरभित्वरन्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में जब घोड़े और सारथी मारे गए, तो उत्तमौजा शीघ्रता से अपने भाई युधिष्ठिर के रथ पर चढ़ गया।
 
When the horses and charioteer were killed in the war, Uttamauja quickly boarded the chariot of his brother Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)