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mahabharat 7.130.35: इसी प्रकार उत्तमौजाने भी अत्यन्त क्रोधित होकर अपने स्वर्ण-जटित बाणों से उसके सारथि को अत्यन्त घायल कर दिया और उसे यमलोक भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.130.35 
तथोत्तमौजा: संक्रुद्ध: शरैर्हेमविभूषितै:।
अविध्यत् सारथिं चास्य प्राहिणोद् यमसादनम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार उत्तमौजाने भी अत्यन्त क्रोधित होकर अपने स्वर्ण-जटित बाणों से उसके सारथि को अत्यन्त घायल कर दिया और उसे यमलोक भेज दिया।
 
Similarly, Uttamaujaane also became very angry and wounded his charioteer deeply with his gold-decorated arrows and sent him to Yamaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)