vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध
»
श्लोक 32
श्लोक
7.130.32
दुर्योधनो युधामन्योर्ध्वजमेकेषुणाच्छिनत्।
एकेन कार्मुकं चास्य चकर्त तनयस्तव॥ ३२॥
अनुवाद
तब आपके पुत्र दुर्योधन ने एक बाण से युधिष्ठिर का ध्वज काट डाला तथा दूसरे बाण से उनके धनुष के दो टुकड़े कर दिये।
Then your son Duryodhana cut off Yudhishthira's flag with one arrow and broke his bow into two pieces with another arrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×