Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.130.18-19h: शकुनि कौरवों के दरबार में खतरनाक पासों से जुआ खेलता था। हालाँकि उसे लगता था कि ये पासे हैं, लेकिन असल में ये घातक बाण थे। 18 1/2 | mahabharat अध्याय 7.130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यान् स्म तान् ग्लहते घोरान् शकुनि: कुरुसंसदि॥ १८॥
अक्षान् स मन्यमान: प्राक् शरास्ते हि दुरासदा:।
अनुवाद
शकुनि कौरवों के दरबार में खतरनाक पासों से जुआ खेलता था। हालाँकि उसे लगता था कि ये पासे हैं, लेकिन असल में ये घातक बाण थे। 18 1/2
Shakuni used to play gambling in the Kaurava court with the dangerous dice in his hands. Though he thought that they were dice, but in reality they were deadly arrows. 18 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥