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mahabharat 7.130.17-18h: शकुन के मन में जुआ खेलने का जो विचार आया था, वह आज इस रूप में साकार हो रहा है। उस दिन सभा में न तो कोई पक्ष जीता, न ही हारा। आज हम यहाँ अपनी जान की बाजी लगाकर जुआ खेल रहे हैं, और असली जीत या हार इसी में होने वाली है। 17 1/2।   |   mahabharat अध्याय 7.130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.130.17-18h 
सम्प्राप्तं तदिदं द्यूतं यत् तच्छकुनिबुद्धिजम्।
न सभायां जयो वृत्तो नापि तत्र पराजय:॥ १७॥
इह नो ग्लहमानानामद्य तावज्जयाजयौ।
 
 
अनुवाद
शकुन के मन में जुआ खेलने का जो विचार आया था, वह आज इस रूप में साकार हो रहा है। उस दिन सभा में न तो कोई पक्ष जीता, न ही हारा। आज हम यहाँ अपनी जान की बाजी लगाकर जुआ खेल रहे हैं, और असली जीत या हार इसी में होने वाली है। 17 1/2।
 
The idea of ​​gambling that had come up in Shakun's mind is actually being fulfilled in this form today. That day, no side won or lost in the assembly. Today, we are gambling here by putting our lives at stake, and the real victory or defeat is going to happen in this. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)