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mahabharat 7.130.10: सचमुच, मेरा भाग्य बुरा है। ये तीनों महारथी तुम जैसे वीर को परास्त करके आगे बढ़ गए हैं, अतः उस युद्ध में मेरा विनाश अवश्यंभावी है।   |   mahabharat अध्याय 7.130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनका द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना, द्रोणाचार्यका उसे द्यूतका परिणाम दिखाकर युद्धके लिये वापस भेजना और उसके साथ युधामन्यु तथा उत्तमौजाका युद्ध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.130.10 
नाश एव तु मे नूनं मन्दभाग्यस्य संयुगे।
यत्र त्वां पुरुषव्याघ्रं व्यतिक्रान्तास्त्रयो रथा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सचमुच, मेरा भाग्य बुरा है। ये तीनों महारथी तुम जैसे वीर को परास्त करके आगे बढ़ गए हैं, अतः उस युद्ध में मेरा विनाश अवश्यंभावी है।
 
Indeed, my fate is bad. These three great warriors have surpassed a brave man like you and moved ahead, so my destruction is inevitable in that war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)