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mahabharat 7.13.8-9h: पाण्डुनन्दन! इसी नीति के अनुसार आचरण करते हुए मैं युद्ध में अपने प्राण त्याग दूँगा; किन्तु किसी भी प्रकार आचार्य का शत्रु नहीं बनूँगा। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.13: अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 13: अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  7.13.8-9h 
अप्येवं पाण्डव प्राणानुत्सृजेयमहं युधि॥ ८॥
प्रतीपो नाहमाचार्ये भवेयं वै कथंचन।
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! इसी नीति के अनुसार आचरण करते हुए मैं युद्ध में अपने प्राण त्याग दूँगा; किन्तु किसी भी प्रकार आचार्य का शत्रु नहीं बनूँगा। 8 1/2॥
 
Pandunandan! Acting according to this policy, I will sacrifice my life in battle; But I will not become Acharya's enemy in any way. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)