श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 13: अर्जुनका युधिष्ठिरको आश्वासन देना तथा युद्धमें द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.13.28 
मोहयित्वा तत: सैन्यं भारद्वाज: प्रतापवान्।
धृष्टद्युम्नबलं तूर्णं व्यधमन्निशितै: शरै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार महाबली द्रोणाचार्य ने पाण्डव सेना को मोहित करके तुरन्त ही अपने तीखे बाणों से धृष्टद्युम्न की सेना का संहार करना आरम्भ कर दिया।
 
Thus, the mighty Dronacharya, having fascinated the Pandava army, immediately began killing Dhrishtadyumna's army with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)